इक मोहब्बत है और उसकी इक निसानी है
इक दिल है जैसे हवेली कोई पुरानी है
सफ़र रात का है और रात भी तूफानी है
समंदर ही समंदर है, कश्ती भी डूब जानी है,
इब्तेदा ऐ इश्क से इन्तहा ऐ इश्क तक,
मैं ही थी बेवफा और मैंने ही वफ़ा निभानी है
मैं लौट आई हूँ मंजिल को देखकर
यहाँ तो यादो की वीरानी ही वीरानी है
ये इंतज़ार ख़तम क्यूँ नही होता किस से पूछूं
क्या कोई मंजिल मेरा मुक़द्दर है,
या यही मेरी अधूरी कहानी है
इक दिल है जैसे हवेली कोई पुरानी है
सफ़र रात का है और रात भी तूफानी है
समंदर ही समंदर है, कश्ती भी डूब जानी है,
इब्तेदा ऐ इश्क से इन्तहा ऐ इश्क तक,
मैं ही थी बेवफा और मैंने ही वफ़ा निभानी है
मैं लौट आई हूँ मंजिल को देखकर
यहाँ तो यादो की वीरानी ही वीरानी है
ये इंतज़ार ख़तम क्यूँ नही होता किस से पूछूं
क्या कोई मंजिल मेरा मुक़द्दर है,
या यही मेरी अधूरी कहानी है