ये मेरा दिवानापन है,या मोहब्बात का सुरूर....! तू ना पहचाने तो है ये तेरी नाजरों का कुसूर....!! बसने लगी आँखों में कुछ ऐसे सपने... कोई बुलाये जैसे नैनों से अपने...!!!