यहाँ हर शख़्स, हर पल
हादसा होने से डरता है,
खिलौना है जो मिट्टी का
फ़ना होने से डरता है.
मेरे दिल के किसीे कोने में
एक मासूम सा बच्चा,
बड़ों की देख कर दुनिया,
बड़ा होने से डरता है.
ना बस में ज़िंदगी इसके
ना काबू मौत पर इसका,
मगर इंसान फिर भी कब
ख़ुदा होने से डरता है.
अजब ये ज़िदगी की क़ैद है
दुनिया का हर इन्सां,
रिहाई मांगता है और
रिहा होने से डरता है..