उठाकर फूल की पत्ती उसने बङी नजाकत से मसल दी इशारो इशारो मेँ कह दिया की हम दिल का ये हाल करते है !!
सारी उम्र पूजते रहे लोग अपने हाथ से बने उस पत्थर के खुदा को हमने खुदा के हाथ से बने हुए एक को चाहा तो हम गुनहगार हो गए !!
किसी ने यूँ ही पूछ लिया हमसे कि दर्द की कीमत क्या है हमने हंसते हुए कहा की पता नहीं कुछ अपने मुफ्त में दे जाते है !!
शाखा से तोड़े गए फूल ने हँस कर ये कहा-अच्छा होना भी बुरी बात है इस दुनिया में !!
सांसों के सिलसिले को ना दो ज़िन्दगी का नाम जीने के बावजूद भी मर जाते हैं कुछ लोग !!