ज़िद ये
मेरी ही थी
कि तुम्हें
अपना बनाऊँ
लेकिन तुम्हें
अपना बनाने
का हुनर
कहाँ से लाऊँ
ना मैं इस
क़ाबिल हूँ शायद
इसलिए शायद
तुझको ना पाऊँ..
मेरी ही थी
कि तुम्हें
अपना बनाऊँ
लेकिन तुम्हें
अपना बनाने
का हुनर
कहाँ से लाऊँ
ना मैं इस
क़ाबिल हूँ शायद
इसलिए शायद
तुझको ना पाऊँ..